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Sunday, 27 October 2013

फासीवादी ताकतों को बेनकाब करें




विद्या भूषण रावत 

झूठ को अति आत्मविश्वास के साथ बोलना और न केवल बोलना अपितु  लगातार बोलना फासीवादी राजनीती का हिस्सा है. इतिहास में 'स्वर्णिम काल' ढूढना और अपनी संस्कृतिक सर्वोच्चता को बोध कराना और दूसरो को नीच और कुत्सित दिखाना उसका एक हिस्सा है. अपने को ' नायक' के तौर पर प्रदर्शित करना और दसूरे नायको को असम्मानित करके देखना, उनकी योग्यता का मज़ाक उडाना और उनकी भाषा शैली और तौर तरीको को सरे बाज़ार मज़ाक करके बोलना फासीवादी जातिवादी अहंकारी राजनीती का  हिस्सा है जो न केवल नरेन्द्र मोदी अपितु उनके भक्तो में भी दिखाई दे रही है जो अधिकाँशतह विदेशो में और सोशल मीडिया की दुनिया का हिस्सा हैं और जो मोदी के जरिये साम्प्रदायिकता, हिंदुत्व की श्रेष्ठता, मुसलमानों, दलितों, पिछडो को उनके 'स्थान' पर खदेड़ने का सपना देख रहे हैं, जिन्हें लगता है के मोदी के जादुई चराग से  भारत दुनिया की महाशक्ति बन जाएगा और जो ये समझते हैं के मोदी एक ही दिन में मुसलमानों को देख लेंगे और पाकिस्तान को दुनिया के नक़्शे से ही गायब कर देंगे।

नरेन्द्र मोदी और हिंदुत्व भारत की जातिवादी वर्णव्यस्था को मजबूत करने वाली ताकतों का नाम है और त्रासदी देखिये के जिस मंडल के विरोध में हिन्दुत्व की राजनीती चली और जिस जातिवाद को लोकतंत्र का दुश्मन बताया गया उसी जाति और उनकी महानता के दुहाई देकर यादवो के वोट लेने के प्रयास किये जा  रहे हैं. हर स्थान पर दलित, पिछडो को उनके भगवानो के लिंक देकर हिंदुत्व के साथ जोड़ने के प्रयास हो रहे हैं. सवाल यह है के क्या भारतीय फासीवाद संस्कृति और शुद्रो के कंधो के सहारे लाने की तैय्यारी चल रही है ? सवाल यह है के क्या आरक्षण विरोधियों को शुद्र दलित माफ़ कर देंगे ? क्या जिन्होंने मंडल की जगह  कमंडल लाया उनका समूचा सफाया नहीं करना चाहिए ? दलित पिछडो के साथ धोखेबाजो को क्या माफ़ कर् दोगे ? हिंदुत्व की पूरी राजनीती ब्राह्मणवादी सल्तनत को मज़बूत करने की राजनीती है ? ये बाबाओं की राजनीती, पुरोहितो की राजनीती, पूंजीपतियों की राजनीती है ? क्या इन ठगों को माफ़ कर् दोगे ? २०१४ बहुत महत्वपूर्ण है. उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता पर बड़ी जिम्मेवारी है ? 

वंशवादी राजनीती का विरोध करने वाले ये बताएं के राम किस आधार पर अयोध्या के राज बने ? वोह ये बताएं के राजस्थान के महारानी के अन्दर कौन सी योग्यता है ? वोह यह बताएं के हिंदुत्व और हिन्दू धर्म की कोई ऐसी परम्परा जहाँ वंश न रहा हो ? क्या भारत का कोई व्यापारिक घराना बिना वंश के चल रहा है ? क्या भारत का कोई फिल्म स्टार बिना वंश के है ? वंशवाद राजनीती में नहीं चल सकता क्योंकि कौन अच्छा है और कौन बुरा यह मोदी के झूठ और हिटलरी अहंकार नहीं अपितु  भारत की जनता बताएगी। हम जानते हैं के कांग्रेस ने इतने वर्षो में   हिंदुत्व के विरूद्ध कार्यवाही नहीं की है और बहुत ही ढुलमुल रवैया अपनाया है. उन्होंने प्रशाशनिक मसलो में राजनीती डालकर हिंदुत्व के आताताइयों को बचाया है. ऐसे में हिंदुत्व के सभी धुरंधर इस वक्त बडबोले हो गए हैं और उनका अहंकार सातवे आसमान पर है . 

सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक न्याय की शक्तियों के सामने है ? वे कहाँ हैं और क्या कर रही हैं कुछ पता नहीं ? आज आरक्षण पर हमला है, जमीनों और जंगल पर हमला है और पूंजी और बाबाओ के गठबंधन ने ये हमला बोला  है और हिंदुत्व के प्रहरी उसके सबसे बड़े एजेंट हैं. झूठ को बार बार दोहर्कार सच बनाने का षड़यंत्र और मीडिया के जरिये सूचनाओं पर नियंत्रण और उसका प्रवाह आज की सबसे बड़ी चुनौती हैं . इस चुनौती को स्वीकार करें और मात्र पिछड़ा या अपनी जाति  का होने भर से गारंटी न ले क्योंकि उसकी विचारधारा और सामाजिक न्याय के प्रति उसकी निष्ठा और इतिहास को जरुर जाँच ले. मीडिया के जरिये हमें भुत को भूलने और केवल 'आर्थिक' नजरिये से चीजो को देखने की हिदायत मिल रही है क्योंकि पूंजीवादियों के कलम घसीट अब जनता को गुमराह करने में नेताओं से भी आगे निकल चुके हैं इसलिए ऐसे लोगो और अफवाहों से सावधान। हिंदुत्व का अजेंडा अफवाहों को फैलाकर दलित पिछडो, आदिवास्सियों और मुसलमानों में संदेह का वातावरण पैदा करना है. उन्हें इस कला में महारत हासिल है अब हमें देखना है के इन पुरातनपंथी दकियानूसी ताकतों का कैसे मुकाबला करें और वो लोकतंत्र में केवल वोट है. इसलिए २०१४ में हमें अपनी बातो को तक अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाए के धार्मिक कठमुल्ला किसी भी तरीके से संसद में बहुमत में न रहे. उन्हें छोड़ जिसकी सरकार बने मुझे कोई दुःख नहि. घिसी पिटी  बने, मायावती, मुलायम, नितीश या किसी और की बने कोई बात नहीं। एक दो साल चले, कोई समस्या नहीं लेकिन ब्राह्मणवादी शातिर हिंदुत्व को हराना हमारा राष्ट्र धर्मं है.